जिले में दुग्ध उत्पादन में हो रही है वृद्धि, पशुपालन को मजबूत करने के लिए मिशन आयोजित कर रहा प्रशिक्षण

सागर उदय

सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा की कहानी की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं सागर जिले  में दुग्ध उत्पादन से रोजगार, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार द्वारा गठित 20 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन के लक्ष्य को  साकार करते हुए जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से सागर जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है। सागर जिले में कृषि के अलावा पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव देखने को मिल रहा है। पशुपालक दूध उत्पादन के माध्यम से अपने परिवार की दैनिक आजीविका का संचालन कर रहे हैं। जिले में सांची, देवी , मुक्त किसान उत्पादक कंपनी के अलावा कुछ निजी कंपनियां भी दूध संग्रहण का कार्य कर रही हैं। अकेले देवी  किसान उत्पादक कंपनी ही प्रतिदिन 15,000 लीटर से अधिक दूध का संग्रहण कर रही है। जिससे पशुपालक किसाना परिवारों को आमदनी प्राप्त हो रही है।

आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों से जुड़े डेयरी कार्य करने वाले परिवारों की कार्यकुशलता बढ़ाने तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का परिचय कराने के उद्देश्य से पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन में संलग्न श्रमशक्ति का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।

जिले में पशुपालन-डेयरी क्षेत्र में 52 गाँवों में क्षीरधारा योजना संचालित है, जिसके तहत 4,131 पशुपालकों का सर्वेक्षण पूर्ण हुआ। 56 गौशालाओं में 17,502 गौवंश संरक्षित तथा 4.13 लाख से अधिक पशुओं का संस्थागत उपचार तथा चलित पशु संजीवनी वाहन से 18,668 बड़े एवं 250 छोटे पशुओं को घर-पहुँच उपचार दिया गया जा रहा है। शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 2,054 हितग्राहियों को ?679.25 लाख की सहायता प्रदान की गई है।

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