वैश्विक मंच पर सांसद डॉ लता वानखेड़े बनी नागरिकों और किसानो के हितों की आवाज
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वैश्विक मंच पर सांसद डॉ लता वानखेड़े बनी नागरिकों और किसानो के हितों की आवाज
बदलती जलवायु में हर व्यक्ति को पौष्टिक भोजन मिले, किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रहे: डॉ. लता वानखेड़े
सागर उदय संवाददाता, सागर
तंजानिया के आरूशा शहर में आयोजित 153वीं इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन असेंबली में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं सागर लोकसभा सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बदलती जलवायु के बीच स्वस्थ, सुरक्षित और सुलभ भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाया। उन्होंने अपने संबोधन में खाद्य सुरक्षा, पोषण, उच्च तकीनीकी कृषि और किसानों की आजीविका के बीच संतुलन को वैश्विक खाद्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
जलवायु परिवर्तन खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती
अंतरराष्ट्रीय मंच से अपने विचार रखते हुए डॉ. वानखेड़े ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज खाद्य उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा और पोषण के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है और इसका प्रभाव विकासशील देशों पर विशेष रूप से पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु-अनुकूल खाद्य व्यवस्था केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं बनेगी, बल्कि इसमें किसानों की आय, कृषि उत्पादकता, पोषण और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना होगा।उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि, प्राकृतिक खेती, संसाधनों के संरक्षण और मोटे अनाजों यानी श्री अन्न को बढ़ावा दे रहा है।
*भारत की योजनाओं को वैश्विक मंच पर रखा* डॉ. वानखेड़े ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और पोषण 2.0 जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के साथ समाज के कमजोर वर्गों तक भोजन की पहुंच सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों पर भी भारत का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों में प्रत्येक देश की कृषि परिस्थितियों और स्थानीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि उत्सर्जन का मुद्दा सीधे खाद्य उत्पादन और उनकी आजीविका से जुड़ा है।डॉ. वानखेड़े ने जोर दिया कि उत्सर्जन में कमी के साथ-साथ जलवायु अनुकूलन, कृषि उत्पादकता और किसानों के लिए जलवायु-लचीलापन भी प्राथमिकता में होना चाहिए।
*खेत से थाली तक स्वस्थ और स्वच्छ भोजन*ह्णसांसद ने भारत की ईट राइट इंडिया और मिशन छ्रऋए जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत स्वस्थ, सुरक्षित और स्वच्छ भोजन विकल्पों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने, खाद्य अपव्यय कम करने, प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने और जलवायु-अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया।उन्होंने खाद्य सुरक्षा से जुड़े भारत के प्रयासों के आंकड़े भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखे। उनके अनुसार, जुलाई 2025 तक 12 लाख से अधिक खाद्य संचालकों को खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका था तथा देशभर में 284 ईट राइट स्टेशन और 249 क्लीन स्ट्रीट फूड हब प्रमाणित किए जा चुके थे।
*किसानों और कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर भी सांसद वानखेड़े ने दिया जोर* डॉ. वानखेड़े ने फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, ढटऋटए, किसान उत्पादक संगठन (ऋढड२) और गोबर-धन जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से खाद्य प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग और मजबूत कृषि आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिल रहा है।उन्होंने भारत की कृषि निर्यात नीति के माध्यम से बाजार तक बेहतर पहुंच और कृषि उत्पादों में विविधता बढ़ाने के प्रयासों को भी रेखांकित किया।अपने संबोधन में डॉ. लता वानखेड़े ने विकसित देशों से वठऋउउउ और पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने तथा विकासशील देशों को पर्याप्त और भरोसेमंद जलवायु वित्त एवं उपयुक्त तकनीक उपलब्ध कराने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि खाद्य प्रणालियों में बदलाव और किसानों की आजीविका की रक्षा किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। सांसदों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और कृषि विकास को प्रभावी कानूनों तथा मजबूत निगरानी के माध्यम से एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
*हर व्यक्ति को सुरक्षित, पौष्टिक और सस्ता भोजन मिले अपने संबोधन के समापन में डॉ. वानखेड़े ने कहा कि भारत दुनिया के देशों के साथ अपने अनुभव साझा करने और सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने एक ऐसे भविष्य की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां हर व्यक्ति को सुरक्षित, पौष्टिक, सस्ता और स्वच्छ भोजन उपलब्ध हो।
153वीं कढव असेंबली के अंतरराष्ट्रीय मंच से डॉ. लता वानखेड़े ने इस प्रकार भारत के खाद्य सुरक्षा मॉडल, किसान-केंद्रित जलवायु नीति और टिकाऊ खाद्य प्रणाली के दृष्टिकोण को सामने रखा तथा वैश्विक समुदाय से सामूहिक प्रयास और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
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