नशामुक्त युवा ही सशक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं : विधायक लारिया

सागर। शुक्रवार को नशा मुक्त भारत सप्ताह में मादक द्रव्यों के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस को दृष्टिगत करते हुए, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सिरोजा एवं जिला प्रशासन-सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सागर के संयुक्त तत्वाधान में ‘नशा मुक्त भारत अभियान: विकसित भारत की पहचान’ विषय पर संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ।
अध्यक्षीय उद्बोधन एवं संगोष्ठी का औचित्य देते हुए संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि बाहर से लिया गया किसी भी प्रकार का पदार्थ नशा है। कोई भी नशा सबसे पहले दिमाग पर कब्जा करता है। हर नशा स्वयं को तो नुकसान करता ही है साथ ही करीबी व्यक्ति को भी हानि पँहुचाता है। नशा मुक्ति का काम यदि कोई कर सकता है तो वह है आत्मशक्ति। हर बुराई को मिटाने के लिए पहले स्वयं को आगे आना होगा। बच्चों के लिए माता-पिता ही आदर्श होते है। अत: उन्हे ऐसा आचरण करना चाहिए जिस पर बच्चे अनुकरण करे और अपने जीवन में अपनाएँ। शराब, सिगरेट, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की लत हमारे युवाओं की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षमता को नष्ट कर रही है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान की शुरूआत की गई है। यह केवल सरकारी कागजों पर चलने वाला कोई अभियान नहीं है, बल्कि यह एक जन-आंदोलन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारे समाज, विशेषकर स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के युवाओं को नशे के जाल से बचाना है। अगर हमें भारत को विश्व गुरु बनाना है, उसे विकसित देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करना है, तो हमें नशे को ना कहना ही होगा।
मुख्य अतिथि नरयावली, सागर (म.प्र.) के विधायक इंजी. प्रदीप लारिया ने कहा कि नशामुक्त युवा ही सशक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। जिस दिन समाज विशेषकर युवा पीढी़ आगे आयेगी तो सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। एक दिन में ही सभी कुछ नहीं बदलेगा, परन्तु एक दिन जरूर बदलेगा। यदि नशा करना है तो देश को आगे बढ़ाने का नशा कीजिए। स्वामी विवेकानंद वि.वि. को इस तरह के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। नशा मुक्ति अभियान में महिलाओं की भूमिका अग्रणी रहती है, उन्हे भी धन्यवाद दिया। मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजनसशक्तिकरण विभाग,सागर (म.प्र.) के संयुक्त संचालक, डी.एस. यादव ने कहा कि- नशा मुक्ति का प्रथम कदम है कि हमें अपनी आत्मशक्ति को जगाना होगा, जिससे अन्य व्यक्ति हमें प्रभावित न कर सकें । हमारा आत्मबल इनता तेज होना चाहिए कि हम नशे को स्वीकार ही न करें। हम सभी इस अभियान में सहभागी बने और एक जागरूक नागरिक की भूमिका निभायें। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण, दमोह, (म.प्र.) के जिला नोडल अधिकारी- डॉ. राघवेन्द्र कुर्मी ने कहा कि- अगर नशा बिकेगा नहीं, तो कोई खायेगा भी नहीं। जब हम समाज में किसी बुराई को स्वीकार कर लेते है फिर उसको मिटाना कठिन हो जाता है। किसी भी प्रकार के नशे को खत्म करने के लिए स्वयं को आगे लाना होगा।
वर्तमान समय में नशा मुक्ति के अनेक उपाय है। अनेक संस्थाएँ खोली गई है, जो नषे से मुक्ति दिलाने में मद्द करती है। नशा न केवल एक व्यक्ति को मारता है, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देता है। घरेलू हिंसा, अपराध और सड़क दुर्घटनाओं के पीछे अक्सर नशा ही मुख्य वजह होता है। विशिष्ट अतिथि सागर के ब्रह्मकुमारी-दीदी कल्पना ने कहा कि- जिस भारत को हम देव एवं संस्कृति की भूमि कहते है। उस देश में यह अभियान चलाया गया यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमे सबसे पहले खुद नशा मुक्त होना पड़ेगा तभी देश नशा मुक्त होगा। नशा सिर्फ मादक पदार्थों का ही नही होता बल्कि अन्य वस्तुओं का भी होता है। वातावरण शुद्ध करने की पहल परिवार से शुरू होकर देश पर खत्म होती है। विशिष्ट अतिथि बी.एम.एस. सागर के मनोचिकित्सक डॉ. संजय जैन ने नशा मुक्त समाज एवं देश आह्वान करने के लिए सभागार में सभी को नशामुक्ति शपथ एवं संकल्प दिलाया। आभार ज्ञापन स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कार्यक्रम संयोजक-राकेश गुरू द्वारा दिया गया। इस अवसर पर भारतीय स्त्रीशक्ति (म.प्र.) की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा तिवारी, डॉ. सुनीता जैन, डॉ. शैलेन्द्र पाटिल, डॉ. अभिषेक तिवारी, डॉ. सुनीता दीक्षित के साथ वि.वि. परिवार के सभी सदस्य एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ संपन्न हुआ।

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