लोभ से कोई लाभ नहीं, संतोषी प्राणी सदा सुखी रहता है : सचिन शास्त्री
>> सागर>> लोभ से कोई लाभ नहीं, संतोषी प्राणी सदा सुखी रहता है : सचिन शास्त्री
लोभ से कोई लाभ नहीं, संतोषी प्राणी सदा सुखी रहता है : सचिन शास्त्री
दस लक्षण पर्व के पंचम दिवस उत्तम शौच धर्म पर हुआ धर्मोपदेश, आत्मशुद्धि और संतोष का दिया संदेश
बीना। दस लक्षण पर्व के पंचम दिवस रविवार को उत्तम शौच धर्म श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को उत्तम शौच धर्म के आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए सचिन शास्त्री ने कहा कि शौच का वास्तविक अर्थ केवल शरीर अथवा बाहरी वातावरण की स्वच्छता नहीं, बल्कि मन को लोभ, लालच और आसक्ति से मुक्त कर आत्मा की पवित्रता की ओर ले जाना है।
सम्यक दर्शन के साथ लोभ का अभाव ही उत्तम शौच
शुचिता अर्थात पवित्रता के भाव को शौच कहा गया है। सामान्य रूप से व्यक्ति शरीर और बाहर की स्वच्छता को शौच मान लेता है, लेकिन धर्म की दृष्टि से इसका स्वरूप कहीं अधिक व्यापक है। सम्यक दर्शनपूर्वक लोभ कषाय के अभाव से उत्तम शौच धर्म प्रकट होता है। जब मनुष्य बाहरी वस्तुओं और विषयों के प्रति अपनी आसक्ति को कम करता है तथा आत्मा के स्वरूप को समझने का प्रयास करता है, तब उसके भीतर वास्तविक पवित्रता का भाव जागृत होता है।
लोभ पाप का बाप, इसलिए त्याग जरूरी
लोभ पाप का बाप है, इसलिए उत्तम शौच धर्म का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोभ के कारण मनुष्य लगातार अधिक से अधिक प्राप्त करने की इच्छा करता रहता है। धन-संपत्ति का लोभ, इच्छाओं का लोभ, पंचेंद्रियों के विषयों का लोभ, ख्याति एवं प्रतिष्ठा का लोभ व्यक्ति के मन को निरंतर अशांत बनाए रखता है।
मनुष्य केवल सांसारिक वस्तुओं का ही लोभ नहीं करता, बल्कि पुण्य प्राप्ति का लोभ भी कर सकता है। यहां तक कि मोक्ष की प्राप्ति का लोभ भी व्यक्ति को वास्तविक आत्मभाव से दूर कर सकता है। इसलिए लोभ का स्वरूप चाहे किसी भी रूप में हो, उसका त्याग आत्मकल्याण के लिए आवश्यक है।
इच्छाओं की दौड़ कभी समाप्त नहीं होती
सचिन शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के पास जितना आता है, उसकी इच्छाएं उतनी ही बढ़ती जाती हैं। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। इसी कारण व्यक्ति जीवनभर अधिक पाने की दौड़ में लगा रहता है, लेकिन मन को स्थायी संतोष प्राप्त नहीं हो पाता।
व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझने लगता है, तभी संतोष का भाव पैदा होता है। संतोष मनुष्य के जीवन में मानसिक शांति और प्रसन्नता लाता है। इसके विपरीत लोभ व्यक्ति को प्राप्त वस्तुओं का सुख भी ठीक से नहीं लेने देता।
पुण्योदय के अनुसार ही मिलती हैं उपलब्धियां
उन्होंने कहा कि पुण्योदय से पहले और पुण्योदय से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता, फिर लोभ क्यों करना। मनुष्य को अपने कर्म और पुण्य के अनुसार ही परिस्थितियां और उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। अधिक पाने की लालसा में जीवन की शांति खो देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में जितना प्राप्त है, उसके प्रति कृतज्ञता और संतोष का भाव रखना चाहिए। अपनी आवश्यकताओं को सीमित करते हुए आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ना ही धर्म का वास्तविक उद्देश्य है।
बाहरी सुख नहीं, आत्मा में खोजें पूर्णता
मनुष्य बाहर की वस्तुओं में सुख और पूर्णता तलाशता है, जबकि हमारी आत्मा अपने आप में पूर्ण है। धन, वैभव, प्रतिष्ठा और विषय-सुख मनुष्य को कुछ समय के लिए आनंद दे सकते हैं, लेकिन स्थायी शांति आत्मा के चिंतन और आत्मानुभूति से ही प्राप्त होती है।
व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन के लिए निकालना चाहिए। बाहरी आकर्षणों से अपना उपयोग हटाकर आत्मा की ओर लगाना ही वास्तविक साधना है।
संतोषी प्राणी सदा सुखी रहता है
संतोषी प्राणी सदा सुखी रहता है। जिसके जीवन में संतोष है, वह सीमित साधनों में भी प्रसन्न रह सकता है, जबकि लोभी व्यक्ति के पास कितना भी वैभव क्यों न हो, उसके मन में अधिक पाने की इच्छा बनी रहती है।
दस लक्षण पर्व आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की साधना का पर्व है। प्रत्येक धर्म मनुष्य को अपनी किसी न किसी आंतरिक कमजोरी को पहचानकर उससे ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। उत्तम शौच धर्म हमें लोभ और अनावश्यक इच्छाओं का त्याग कर संतोष एवं आत्मचिंतन की राह पर चलने का संदेश देता है।
आत्मचिंतन से होगा आत्मकल्याण
शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे उत्तम शौच धर्म को केवल सुनने या समझने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने आचरण में उतारें। धन, प्रतिष्ठा और सांसारिक उपलब्धियों के पीछे भागने के बजाय आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानने का प्रयास करें।
लोभ का त्याग, संतोष का भाव और आत्मा में उपयोग लगाना ही उत्तम शौच धर्म की सार्थकता है। इसी भाव के साथ उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के आत्मकल्याण, सुख, शांति और धर्ममय जीवन की मंगलकामना की।
Related
Related Post
- July 26, 2026 • 👁 32
- by Sagar Uday
- 0
- 6:50 pm
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के सफल विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का सम्मान समारोह आयोजित
गायत्री शक्तिपीठ गोपालगंज में विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन ने प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को किया…
- September 21, 2026 • 👁 3
- by Sagar Uday
- 0
- 8:35 pm
