शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज की लापरवाही और शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल, पांच सदस्यीय कमेटी की जांच भी कठघरे में

बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल और सप्लीमेंट्री आने के बाद उठे सवाल, जांच में कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था की पड़ताल के बजाय विद्यार्थियों को आश्वासन देने तक सीमित रहने के आरोप

सागर उदय संवाददाता, सागर

शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज के परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने और सप्लीमेंट्री आने के बाद विद्यार्थियों एवं छात्र संगठनों द्वारा कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर कलेक्टर के निर्देश पर पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया, लेकिन विद्यार्थियों का आरोप है कि कमेटी की कार्रवाई वास्तविक शैक्षणिक व्यवस्था की जांच करने के बजाय विद्यार्थियों को आश्वासन देने तक सीमित रही।

विद्यार्थियों का कहना है कि जांच का मुख्य विषय यह होना चाहिए था कि कॉलेज प्रबंधन की कथित लापरवाही के चलते इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी फेल कैसे हुए और बड़ी संख्या में सप्लीमेंट्री क्यों आई। कॉलेज में शिक्षण व्यवस्था किस प्रकार संचालित हो रही है, विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मिल रही है या नहीं, शिक्षकों की कक्षाओं में उपस्थिति एवं अध्यापन की स्थिति क्या है और शासन से मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के संसाधनों एवं योजनाओं का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक थी।

शैक्षणिक व्यवस्था की जांच के बजाय विद्यार्थियों को मनाने का आरोप

विद्यार्थियों और छात्र संगठनों का आरोप है कि पांच सदस्यीय कमेटी द्वारा कॉलेज की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था की विस्तृत जांच नहीं की गई। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं अथवा परीक्षा परिणाम से जुड़े विषयों की जांच से पहले कॉलेज की उस व्यवस्था की पड़ताल होनी चाहिए थी, जिसके तहत पूरे वर्ष विद्यार्थियों को पढ़ाया गया।

विद्यार्थियों का यह भी सवाल है कि यदि कॉलेज में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हुईं और विद्यार्थियों को पर्याप्त अध्ययन कराया गया तो इतनी अधिक संख्या में विद्यार्थी फेल अथवा सप्लीमेंट्री कैसे हो गए। क्या कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियां वास्तव में संचालित हो रही हैं या केवल कागजों तक सीमित हैं? शासन द्वारा कॉलेज को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और योजनाओं का वास्तविक लाभ छात्राओं को मिल रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की मांग उठ रही है।

योजनाएं और गतिविधियां केवल फोटो तक सीमित होने का सवाल

विद्यार्थियों एवं छात्र संगठनों ने कॉलेज में संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं और गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में शासन की योजनाओं एवं गतिविधियों का संचालन केवल फोटोग्राफी अथवा कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि योजनाओं पर राशि खर्च हो रही है तो उसका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों को मिलना चाहिए।

विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर लगातार योजनाएं चला रही है। ऐसे में यदि शासकीय कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को ही पर्याप्त शैक्षणिक सुविधा नहीं मिलती और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा में असफल होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

तीन लोगों पर एफआईआर के बाद कॉलेज प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल

इसी बीच कॉलेज से जुड़े मामले में तीन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉलेज प्रबंधन की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन सी घटना हुई, जिसके कारण तीन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करना पड़ा।

कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर विरोध के स्वर तेज होने के बीच विद्यार्थियों का आरोप है कि व्यवस्था में सुधार करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय एफआईआर के माध्यम से विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि किसी समस्या को लेकर छात्र संगठन कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हैं और बहस या विवाद की स्थिति बनती है तो क्या हर बार एफआईआर के माध्यम से मामला शांत कराया जाएगा?

विद्यार्थियों के मन में एफआईआर को लेकर भय

तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पढ़ाई के दौरान यदि वे किसी शिक्षक से कोई सवाल पूछते हैं तो क्या उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो सकती है? यदि कोई विद्यार्थी संगठन अपनी समस्या रखने कॉलेज प्रशासन के पास जाता है और बातचीत के दौरान आवाज ऊंची हो जाती है अथवा धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनती है तो क्या उसके खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा?

विद्यार्थियों का कहना है कि इस प्रकार का माहौल उन्हें निराश कर रहा है। एक ओर उनकी शैक्षणिक समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा और दूसरी ओर विरोध करने पर कार्रवाई का भय बना हुआ है। उनका आरोप है कि इससे विद्यार्थियों की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है।

छात्र संगठनों ने बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

इस पूरे मामले को लेकर विद्यार्थी संगठनों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्र नेताओं का कहना है कि वे फिलहाल कॉलेज के विद्यार्थियों से चर्चा कर रहे हैं। सभी विद्यार्थियों की राय लेने के बाद शीघ्र ही एक बड़ा संगठन बनाकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

छात्र संगठनों का कहना है कि यदि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के बजाय एफआईआर दर्ज कराने की पद्धति जारी रही तो वे मौन नहीं बैठेंगे। उनका कहना है कि विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी स्थिति में प्रशासनिक लापरवाही अथवा शैक्षणिक व्यवस्था की खामियों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।

जांच का दायरा कॉलेज की पूरी व्यवस्था तक होना चाहिए

विद्यार्थियों की मांग है कि जांच कमेटी को केवल परीक्षा परिणाम अथवा उत्तर पुस्तिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सबसे पहले यह जांच होनी चाहिए कि पूरे शैक्षणिक सत्र में कॉलेज में शिक्षण व्यवस्था किस प्रकार संचालित हुई। कितनी कक्षाएं नियमित लगीं, विद्यार्थियों को कितना अध्यापन कराया गया, विषयवार शिक्षकों की स्थिति क्या रही और कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों का वास्तविक संचालन किस स्तर पर हुआ।

विद्यार्थियों का कहना है कि यदि जांच में शैक्षणिक अथवा प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए। केवल विद्यार्थियों को आश्वासन देकर मामले को शांत कर देना पर्याप्त नहीं होगा।

इनका कहना है

पांच सदस्यीय टीम द्वारा विद्यार्थियों से बात की गई है। परीक्षा फीस जो 400 रुपये थी, वह 200 रुपये ली जाएगी। उत्तर पुस्तिकाएं अभिभावकों के सामने दिखाई जाएंगी। छात्राएं सभी गतिविधियों में भाग ले सकेंगी और नियमित रूप से कक्षा में बैठ सकती हैं।

राजकुमार गोस्वामी, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, सागर।

Leave a Reply

Related Post

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का सार्वजनिक जीवन सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है  : पूर्व मंत्री, विधायक  भूपेन्द्र सिंह
सागर/खुरई/बांदरी। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सेवा काल के…
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ प्रांत की प्रांत संगठक सुश्री रचना जानी का सागर प्रवास
प्राध्यापकों एवं विश्वविद्यालय के कुलपति से हुई सार्थक चर्चा सागर उदय संवाददाता, सागर विवेकानंद केंद्र,…
ज्ञान सागर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया 400 केवी सबस्टेशन साईंखेड़ा का तकनीकी भ्रमण
सागर उदय, सागर ज्ञान सागर कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग, सागर के इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ए)…

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading